20260516

 तुम्हारी मुस्कान पर हमने

अपनी हर खुशी वार दी थी,

और तुमने उसी दिल को

तन्हाइयों की सजा दी थी।


जिसे अपना खुदा समझा,

वो किसी और की दुआ निकली,

हम जिस कहानी में डूबे थे,

वो बस अधूरी वफ़ा निकली।

तुम्हारे झूठ भी सच लगते थे,

इतना तुम पर ऐतबार था,

पर तुमने दिल तोड़कर बता दिया,

इश्क़ भी कितना लाचार था।


अब न शिकायत है तुमसे,

न कोई गिला बाकी है,

बस एक दर्द है सीने में,

तुम्हारी यादों का साथी है।


कभी सोचा न था कि

मोहब्बत यूँ बदनाम होगी,

जिसे चाहा था जान से ज़्यादा,

वही किसी और के नाम होगी।

                       __ मनीष सोलंकी

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