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20190405

बुड़बक बनाते हैं

भारत के भोले लोगों को बुड़बक बनाते हैं
खुद को ये  साधु-संत और ज्ञानी बताते हैं,
ये  नाम  मोदी,   रामदेव   जैसे   हैं   मगर
है  वर्ग  वही  जिसमें  आशाराम  आते  हैं।

थोड़े  हैं  छुट्टे  लोग, थोड़े आर एस एस  से
कहते थे काला  धन  को  लाएँगे  विदेश से,
क्या खो गई है सूची जिसमें नाम सब के थे?
या  फिर  हैं भाजपा  के ज्यादा  काँग्रेस से?

अच्छे  दिनों  के  ख्वाब सारे   टूट  ही  गए
जो  कुछ  थे नोटबंदी  में  वो लुट  ही  गए,
महिला थी एक मित्र वो भी  छोड़कर  गई
उनकी  भी  छूटी  थी  हमारे  छूट  ही  गए।

जनता बिलख   रही  है  कोई  सुध  नहीं  है
छाती  बहुत  बड़ी  है   मगर   दूध  नहीं   है,
वो  नरपति   जो   भोगी   और   स्वार्थी  रहे
राजद्रोही   है,    वो   कोई   भूप   नहीं   है ।

_ मनीष सोलंकी

20180125

आँसू
















सुख-दुख के आँसू मे तू अंतर बतला दे,
बहते हैं नयानो से ही, तू घर बतला दे;
दोनो मे ही लवन घुले हैं, माप बता दे,
गालों पर कैसा है उनका, छाप बता दे।
दुख मे मन हल्का होता है ,
सुख मे उसका काम बता दे ;
बता सके तो दोनो का तू ,
अलग -अलग दो नाम बता दे।
प्रसव-पीड़ा मे मामतामय प्यार के आँसू,
दुल्हन के दो अलग-अलग संसार के आँसू;
बता सके तो तू इनमे अंतर बतला दे,
बहते हैं नयनो से ही तू घर बतला दे।

20170717

ये वो राजपुताना है

राजस्थान में राजपूतों पर हो रहे अत्याचार भाजपा सरकार सोंची समझी साजिश है। इन्हें हमेशा एक मुद्दे की जरूरत पड़ती है लोगों को उलझाने के लिए।पहले हिंदु-मुसलमान और अब ऊँची और नीची जाति जैसे मुद्दे की भी तैयारी चल रही है।और, जो इनका विरोध करेगा, उसका वही हाल होगा जो अनंदपाल का हुआ।
लेकिन अब इनकी ये चाल और अधिक नहीं चलेगी।देश के सभी राजपूतों तक इनके घिनौने करतूतों का संदेश पहुँचा है।
इन निम्न कोटि के शासकों/राजनेताओं को एक संदेश मैं अपनी इन पंक्तियों के माध्यम से दे रहा हूँ__


सत्ता, शासन, राजकर्म से रिश्ता बहुत पुराना है,
जिसकी वीरता का समस्त विश्व ने लोहा माना है,
करता आया भारत भूमि की सेवा जो सदियों से,
मत भूलो ऐ तुच्छ शासकों ये वो राजपुताना है।
जिसने स्वाभिमान के लिए शीश कटाना जाना है,
प्रजा का हित परम कर्म है जिसने ऐसा माना है,
जिसने पर स्त्रियों को माताओं सा सम्मान दिया,
मत भूलो ऐ तुच्छ शासकों ये वो राजपुताना है।
पूछ रहा हूँ एक सवाल, प्रथम यही और अंतिम भी,
बंद करोगे अत्याचार या इतिहास दुहराना है ?
लाखों पृथ्वीराज अभी और लाखों ही महाराणा हैं,
मत भूलो ऐ तुच्छ शासकों ये वो राजपुताना है।